FOOD & DRINKS

Best food and drink in Varanasi

11

May
2018
ईद मुबारक
Posted by: admin /2560
ईद की सारी यादें “ईदगाह” से ताज़ा हो जाती हैं | ईदगाह वो सिगरा वाला नहीं …. प्रेमचंद की कहानीवाला ईदगाह….चिमटे की कहानी वाला ईदगाह …| प्राइमरी की क्लास में मास्टर जी ईदगाह कहानी उसी से पढ़वाया करते थे …. “तुम्हारी उँगलियॉँ तवे से जल जाती थीं, इसलिए मैने इसे लिया|” इतनापढ़कर वो अक्सर रो […]

11

May
2018
शायद यह जानने
Posted by: admin /1890
शायद यह जानने के लिए शाम को पतंगे और ज्यादा ऊंचाई पर उड़ जाती है कि सूरज किसके पीछे छिप रहा है ……या फिर यह भी हो सकता है कि पतंग एक नज़र में सारे बनारस को देख लेनाचाहती हो | वह हर गली के ऊपर घूमना चाहती हो| वह हर बनारसी के आँगन में […]

11

May
2018
वोअस्सी घाट था
Posted by: admin /2150
वोअस्सी घाट था जहाँ पर मन जेब के सिक्के की तरह निकल कर खन्न से लुढ़क गया था |……..घाट की सबसे ऊपर वाली सीढ़ी से गंगा मैया के आँचल तक लुढ़का था | लेकिन वो वहीँ पर पड़ा नहीं रहा था | उठकर आया था ….मेरे से एक हाँथ सामने खड़ा था| मेरे उदास चेहरे […]

11

May
2018
मैं..बनारस हूँ
Posted by: admin /1780
मैं..बनारस हूँ ! ध्यान रहें महाभारत वाला समय नहीं | मेरी अपनी घड़ी है उस ‘समय’ से बिलकुल अलग, अलमस्त सी, क्यूट सी |समय तो यहाँ दशाश्वमेघ घाट पर नहाता है फिर अस्सी घाट पर भाँग खाये पड़ा रहता है | मैंने सतयुग देखा है और तुम सबको भी देख रहा हूँ | सचमें, सतयुग […]

11

May
2018
शुरुआतही कुछ ऐसी हुई है|
Posted by: admin /2790
……शुरुआतही कुछ ऐसी हुई है| …जैसे शरीर में ढेर सारी नसें बिछी हुई है, टेढ़ी-मेढ़ी, छोटी-लम्बी, चौड़ी-संकरी और कुछ बेअंत-सी जैसे की बनारस की उलझी हुई सी सुलझी गलियां| सही कह दूँ तो शरीर में एक छोटा सा बनारस बस गया है| और इन नसों में ये गलियां बिछ गई हैं| बसइन्हीं पर भागने का […]

Leave your comment

Please enter comment.
Please enter your name.
Please enter your email address.
Please enter a valid email address.